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लोकसभा में ‘महायुद्ध’ पर राहुल गांधी की स्पीकर के नाम चिट्ठी,’विपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र पर कलंक’

नेशनल डेस्क: लोकसभा में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर हुए विवाद के बाद नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कड़ा एतराज जताया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार के दबाव में उन्हें संसद में बोलने से रोका गया, जो संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व घटना बताते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर चुप कराना लोकतंत्र पर सीधा आघात है।

 विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस में हिस्सा ले रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक मैगजीन आर्टिकल का हवाला दिया, जिसमें पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अभी तक प्रकाशित न हुई किताब “Four Stars of Destiny” के कुछ अंशों का जिक्र था। इन अंशों में 2020 के भारत-चीन सीमा संकट, खासकर लद्दाख में चीनी टैंकों की मौजूदगी और उस दौरान लिए गए फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए थे।

स्पीकर ने क्यों रोका भाषण?

सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई कि किसी अप्रकाशित किताब या मैगजीन में छपे अंशों को संसद में आधिकारिक तौर पर उद्धृत नहीं किया जा सकता। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने नियम 349 का हवाला देते हुए राहुल गांधी को आगे बोलने से रोक दिया। इस फैसले के विरोध में सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

 राहुल गांधी के पत्र में क्या कहा गया?

राहुल गांधी ने स्पीकर को लिखे पत्र में कई अहम बातें रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में जिन दस्तावेजों का उल्लेख किया गया, उनकी जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं ली और उन्हें ऑथेंटिकेट भी किया।संसदीय परंपरा के अनुसार, किसी सदस्य के दस्तावेज का हवाला देने के बाद सरकार को जवाब देने का अवसर मिलता है, न कि सदस्य को रोक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का अहम हिस्सा थी, जिस पर बोलना विपक्ष के नेता का अधिकार ही नहीं, कर्तव्य भी है। राहुल ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर चुप कराया गया, जो निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि वे सदन के निष्पक्ष संरक्षक की भूमिका निभाते हुए सभी सदस्यों के बोलने के अधिकार की रक्षा करें। राहुल गांधी ने अपने पत्र में इस पूरे घटनाक्रम के खिलाफ “कड़ा विरोध” दर्ज कराया है।

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