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मैक्स अस्पताल, लखनऊ के डॉक्टरों ने नेपाल के 19 महीने के बच्चे को जन्मजात किडनी और गॉल ब्लैडर की बीमारी से दी नई ज़िंदगी

लखनऊ, : मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, लखनऊ के डॉक्टरों ने नेपाल से आए 19 महीने के एक बच्चे का सफल इलाज कर उसे नई ज़िंदगी दी। बच्चे में किडनी और गॉल ब्लैडर से जुड़ी जन्मजात और बेहद दुर्लभ बीमारियां एक साथ पाई गई थीं, जिससे उसकी हालत काफी गंभीर हो गई थी।
बच्चे में हॉर्सशू किडनी की समस्या थी, जिसमें दोनों किडनियां आपस में जुड़कर घोड़े की नाल जैसी बन जाती हैं। इसके साथ ही बच्चे को दोनों किडनियों में बाइलेटरल यूरेटर पेल्विक जंक्शन ऑब्स्ट्रक्शन (यूपीजेओ) था, यानी किडनी से पेशाब निकलने के रास्ते में रुकावट। इस रुकावट के कारण दोनों किडनियां बहुत अधिक सूज गई थीं और बच्चे के पेट का बड़ा हिस्सा घेर चुकी थीं, जिससे किडनी खराब होने का गंभीर खतरा बन गया था। इसके अलावा बच्चे के गॉल ब्लैडर में पथरी और कॉमन बाइल डक्ट (सीबीडी) में भी पथरी पाई गई।


नेपाल में कई अस्पतालों में दिखाने के बावजूद बच्चे की कम उम्र और बीमारी की जटिलता को देखते हुए सर्जरी को संभव नहीं माना गया। इसके बाद परिजन बच्चे को मैक्स अस्पताल, लखनऊ लेकर आए, जो उन्नत बाल यूरोलॉजी और कम चीरे वाली सर्जरी के लिए जाना जाता है।
बच्चे की स्थिति के बारे में बताते हुए डॉ राहुल यादव, डायरेक्टर, यूरोलॉजी, एंड्रोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक यूरो-ऑन्कोलॉजी, मैक्स अस्पताल, लखनऊ, ने कहा, “जब बच्चा हमारे पास आया, तब दोनों किडनियां बहुत अधिक सूजी हुई थीं और पेट के अधिकतर हिस्से में फैल चुकी थीं। इतने छोटे बच्चे में, इतनी कम जगह में सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसी वजह से हमने एक एनेस्थीसिया में, कई विभागों की टीम के साथ मिलकर सर्जरी की योजना बनाई।”करीब 4 घंटे चली सर्जरी में यूरोलॉजी टीम ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के ज़रिये दोनों किडनियों में मौजूद रुकावट को दूर किया और पेशाब का रास्ता खुला रखने के लिए छोटे ट्यूब (स्टेंट) लगाए। उसी समय गैस्ट्रो सर्जरी टीम ने लैप्रोस्कोपिक तरीके से गॉल ब्लैडर को निकालने की प्रक्रिया पूरी की। वहीं गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम ने कॉमन बाइल डक्ट में मौजूद पथरी का दवाओं से इलाज किया और ज़रूरत पड़ने पर एंडोस्कोपिक प्रक्रिया की तैयारी भी रखी।


सर्जरी के दौरान टीमवर्क के बारे में बताते हुए, डॉ अजय यादव, डायरेक्टर एवं हेड, रोबोटिक सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी एवं जीआई ऑन्कोलॉजी, मैक्स अस्पताल, लखनऊ, ने कहा, “यूरोलॉजी सर्जरी में लगाए गए उन्हीं पोर्ट्स का इस्तेमाल करते हुए गॉल ब्लैडर की सर्जरी भी की गई। इसके लिए अलग से चीरे नहीं लगाने पड़े। इससे बच्चे को बार-बार सर्जरी और बेहोशी से बचाया जा सका और उसे न्यूनतम ट्रामा होने की वजह से रिकवरी तेजी से हुई।”बच्चे के छोटे पेट और गंभीर हालत के बावजूद सर्जरी पूरी तरह सफल रही। सर्जरी के 12 घंटे के भीतर बच्चे को दोबारा दूध पिलाना शुरू कर दिया गया और केवल 4 दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी हालत लगातार बेहतर हो रही है।
इस मामले पर बात करते हुए डॉ एम यू हसन, डायरेक्टर एवं एचओडी, डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक एंड नियोनैटोलॉजी, मैक्स अस्पताल, लखनऊ, ने कहा , “यह बच्चा बहुत बड़े जोखिम में था। अगर समय पर सर्जरी नहीं होती, तो उसकी विकास और ज़िंदगी दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता था। समय रहते इलाज होने से अब उसे एक सामान्य और स्वस्थ जीवन का पूरा मौका मिला है।”यह दुर्लभ और सफल इलाज मैक्स अस्पताल, लखनऊ की उन्नत बाल चिकित्सा, कम चीरे वाली सर्जरी और अलग-अलग विभागों के मिलकर किए गए इलाज की क्षमता का प्रमाण है।

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