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अपोलोमेडिक्स लखनऊ की टीम ने मिर्गी की जटिल सर्जरी से किया सटीक इलाज

  • बरसों से चल रहे दौरों और बेअसर दवा से बनी परेशानियों पर सर्जरी से लगी रोक
  • डॉक्टरों की मेहनत से मिर्गी के मरीज़ को मिली नई शुरुआत

लखनऊ: : न्यूरोलॉजी की जटिल परेशानियों के इलाज के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि के रूप में, अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ ने 31 साल की एक महिला का सफल इलाज किया है, जो लंबे समय से मिर्गी की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। दवाइयों के बावजूद उनके दौरे काबू में नहीं आ रहे थे। यह सफलता अस्पताल की अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की साझा मेहनत और मिर्गी सर्जरी में अनुभव को दिखाती है।
मरीज को बचपन से ही बार-बार मिर्गी के दौरे पड़ते थे। इलाज के लिए उन्होंने कई डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन दवाइयों की डोज़ बढ़ाने के बाद भी कोई खास फायदा नहीं हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक दवाइयां लेने से उन्हें दूसरी परेशानियां भी होने लगी थीं।
अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल में निदेशक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण शर्मा की देखरेख में मरीज की पूरी जांच की गई। इसमें दिमाग का एमआरआई, वीडियो ईईजी जांच, पीईटी-सीटी स्कैन और मानसिक कार्यक्षमता से जुड़ी जांच शामिल थी। सभी रिपोर्ट्स के आधार पर मामला अस्पताल की एपिलेप्सी क्लिनिक में डॉक्टरों की साझा बैठक में रखा गया।
इस टीम में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण शर्मा, डॉ. गोपाल पोडवाल और डॉ. प्रदीप, न्यूरोसर्जन डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव (निदेशक एवं प्रमुख, न्यूरोसर्जरी) के साथ डॉ. सौरभ वर्मा, डॉ. अखिलेश और डॉ. दिवाकर, तथा रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शुचि शामिल थीं। गहरी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि मिर्गी का कारण दिमाग के दाहिने हिस्से के सुपीरियर टेम्पोरल जायरस में मौजूद है।इसके बाद डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव ने दाईं ओर मिनी-क्रैनियोटॉमी सर्जरी की।
सर्जरी के दौरान लगातार विशेष मशीनों से दिमाग़ की गतिविधि पर नजर रखी गई, ताकि मिर्गी पैदा करने वाले हिस्से को पूरी सटीकता से हटाया जा सके और आसपास के दिमागी हिस्सों को नुकसान न पहुंचे। निकाले गए टिशू को जांच के लिए भेजा गया।
पैथोलॉजी विभाग की निदेशक डॉ. कविता सोमानी ने जांच में टाइप 2 कॉर्टिकल डिस्प्लेसिया की पुष्टि की, जो मिर्गी के उन मामलों में पाया जाता है जहां दवाइयां असर नहीं करतीं। सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर रही और उन्हें चौथे दिन कम दवाओं के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस बारे में डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव ने कहा, “मिर्गी की सर्जरी में अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों के बीच बेहतर तालमेल के साथ बहुत सटीक इलाज जरूरी होता है। हमारी एपिलेप्सी क्लीनिक की टीम ऐसे मरीजों को बेहतर इलाज दे पा रही है, जिन पर आम इलाज का असर नहीं हो रहा था।”
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह सफलता अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल, लखनऊ को उन्नत मिर्गी इलाज के एक प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत करती है और उत्तर प्रदेश व आसपास के इलाकों के ऐसे मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आती है, जिनकी मिर्गी दवाओं से ठीक नहीं हो पा रही थी।

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