
एजेंसी
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी सियासी जंग शुक्रवार को और तेज हो गई। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों को तैनात करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जनता की बड़ी जीत बताया। वहीं भाजपा ने राज्य सरकार पर जमीनी स्तर पर भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई टीएमसी सरकार के बीच ‘विश्वास की कमी’ को उजागर करते हुए राज्य में विवादों से घिरी एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का एक ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया।
ये जनता की बड़ी जीत -टीएमसी बोली-
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी ने दावा किया कि इससे एसआईआर अभियान में अनियमितताओं के उसके आरोपों की पुष्टि हुई है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि बंगाल की जनता के लिए एक बड़ी जीत। आज चुनाव आयोग के अहंकार का ऐतिहासिक रूप से पर्दाफाश हुआ है।
टीएमसी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची निरीक्षक वैध दावों को नजरअंदाज कर रहे थे और वैध मतदाताओं को मिटाने की कोशिश कर रहे थे। उसने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्देश देकर ‘करारा प्रहार’ किया है कि सभी दावों, आपत्तियों और विसंगति के मामलों को कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त निष्पक्ष न्यायिक अधिकारियों द्वारा निपटाया जाए।
गंभीर आरोप भाजपा ने ममता सरकार पर लगाए
दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने इस गतिरोध के लिए ममता बनर्जी सरकार को जिम्मेदार ठहराया। मजूमदार ने कहा कि टीएमसी सरकार जमीनी स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है और एसआईआर अभ्यास का विरोध कर रही है।

















