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टीईटी अनिवार्यता को लेकर बजट के बाद बढ़ी नाराजगी; दी ये चेतावनी

लखनऊ वार्ता ब्योरो

देश और प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा राहत न दिए जाने से एक बार फिर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है। वर्तमान संसद के बजट सत्र में उन्हें राहत की उम्मीद थी लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है। ऐसे में अलग-अलग शिक्षक संगठन फिर से आंदोलन की राह पर हैं।एक तरफ जहां टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) की ओर से प्रदेश भर में शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी का पुतला फूंका गया था। वहीं टीईटी अनिवार्यता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही शिक्षा मंत्रालय द्वारा सही ठहराने पर विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने विरोध किया है। साथ ही संयुक्त मोर्चा के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करने की बात कही है।एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के टीईटी अनिवार्यता पर दिए गए आदेश के लगभग 6 महीने बाद भी केंद्र सरकार की ओर से शिक्षकों को राहत देने की प्रक्रिया नहीं शुरू की गई। उन्होंने कहा कि यह शिक्षकों के साथ धोखा व अन्याय है। इन शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय एनसीईटी द्वारा निर्धारित सभी अहर्ताएं पूरी कर नौकरी पाई है। आज उन पर नए नियम लगाना सही नहीं है। संगठन ऐसे निर्णय का कड़ा विरोध करता है।

प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि 20-25 वर्ष की सेवाएं दे चुके शिक्षक अब टीईटी में शामिल होंगे। 23 अगस्त 2010 के पहले नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से राहत दी जाए। उन्होंने सभी शिक्षक-कर्मचारी संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर लड़ाई के लिए आने का आह्वान किया। दिलीप चौहान ने कहा कि अब केंद्र सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके लिए जल्द सभी संगठनों की बैठक कर व्यापक आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर बुधवार को लखनऊ समेत प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनर्स ने प्रदर्शन किया। राजधानी में स्व.बीएन सिंह की प्रतिमा स्थल पर बड़ी संख्या में जुटे आंदोलनकारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) लागू करने, आठवें वेतन आयोग का लाभ देने, संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने और बिजली के निजीकरण व विद्यालयों के विलय के निर्णय वापस लेने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने नौ सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष कमल अग्रवाल ने कहा कि ओपीएस लागू न होने से कर्मचारियों में आक्रोश है। इस दौरान अमरनाथ यादव, एसपी सिंह और जेपी पांडेय समेत विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

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