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मोहन भागवत बोले-मुस्लिम भी हिंदू हैं ,हिंदू 3 बच्चे पैदा करें, UGC नियम किसी के खिलाफ नहीं

लखनऊ वार्ता प्रभारी

मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ में कहा- भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे कोई अरब से नहीं आए है। घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा।

संघ प्रमुख ने बढ़ती घुसपैठ पर कहा, घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है।

हिंदुओं की घटती जनसंख्या दर पर कहा, हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। अभी जनसंख्या दर 2.1 है। यह कम से कम 3 होनी चाहिए। जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। अब जो भी बच्चे शादी कर रहे हैं, उन्हें बताइए कि कम से कम तीन बच्चे पैदा करें।

उन्होंने कहा-

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यदि एक व्यक्ति गड्ढे में गिरा हुआ है तो उसे बाहर निकलने के लिए हाथ उठाना होगा और बाहर खड़े व्यक्ति को उसे बाहर निकालने के लिए थोड़ा झुककर हाथ बढ़ाना होगा, जब दोनों हाथ बढ़ाएंगे तो ही बात बनेगी।QuoteImage

अमेरिका और चीन से चेताया संघ प्रमुख ने कहा, अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा। एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा।

मुगल और अंग्रेज हिंदू धर्म संस्कृति को मिटा नहीं सके जातिवाद पर मोहन भागवत ने कहा, 500 साल मुगल और 200 साल अंग्रेज शासन कर चले गए, लेकिन हिंदू धर्म संस्कृति इतनी मजबूत है कि उसे मिटा नहीं सके। जब इतने सालों में हिंदू धर्म का कोई कुछ नहीं बिगड़ सका तो कोई अब क्या बिगाड़ पाएगा।

समाज में जो जाति की विषमता फैल रही है, उसे दूर करना होगा। यह किसी सरकार या संगठन का काम नहीं है, बल्कि इसे समाज के प्रत्येक वर्ग और व्यक्ति को मिलकर करना होगा। अपनी बिरादरी के लोगों की शिक्षा और उन्नति का प्रयास करें। हर बिरादरी में अपना एक मित्र और परिवार बनाएं। आसपास के लोगों के साथ सद्भाव बनाएं।

UGC पर सरकार जो कानून बनाए, उसका पालन करना चाहिए UGC गाइडलाइंस पर मोहन भागवत ने कहा, कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियों के झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए।

UGC को लेकर एक पक्ष को लगता है कि ये हमारे खिलाफ है। दूसरे पक्ष को लगता है कि हमारे साथ है। सरकार नियम बनाती है। यदि किसी को वह अच्छा नहीं लगता है तो अपनी बात रखनी चाहिए।

समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए। संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सरकार जो भी कानून बनाए, उसका पालन करना चाहिए

सद्भाव बढ़ाने की जरूरत संघ प्रमुख ने कहा, सद्भाव ना रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा।

उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है। जो विरोधी हैं, उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते। एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा।

मातृशक्ति परिवार का आधार, महिलाएं अबला नहीं मोहन भागवत ने कहा, घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है। हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह मातायें तय करती थी। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है। महिला को हमें अबला नहीं मानना है, वह असुर मर्दिनी है। हमने स्त्री की, प्रकृति की जो कल्पना की, वह बलशाली है। महिलाओं को आत्म संरक्षण का प्रशिक्षण होना चाहिए। पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है, हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है।

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