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मुरादाबाद में दारोगा सहित 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड, मेडिकल स्टोर पर की थी फर्जी रेड; वसूले थे 40 हजार

संजय कुमार सिंह

मुरादाबाद में मेडिकल स्टोर पर फर्जी छापेमारी और 40 हजार की वसूली के आरोप में सर्विलांस प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित. एसएसपी ने विभागीय जांच के आदेश दिए. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कानून के रखवालों द्वारा ही कानून को ताक पर रखने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक मेडिकल स्टोर पर फर्जी छापेमारी कर भारी वसूली करने के आरोप में एसएसपी सतपाल अंतिल ने सख्त रुख अपनाया है. एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए सर्विलांस सेल के प्रभारी दारोगा वीर बोस और चार सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. दरअसल, इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि इन्होंने खुद को ड्रग विभाग का दस्ता बताकर एक व्यापारी को डराया. साथ ही कार्यवाही बचने के लिए उससे 40 हजार रुपये की रिश्वत ली. पुलिस के आला अधिकारियों को सीसीटीवी फुटेज में इस संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि होने के बाद यह कड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एसएसपी ने विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं.

सर्विलांस टीम ने बोला था धावा

इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सुरक्षा देने वाली टीम ही लुटेरों की भूमिका में नजर आई है. बता दें कि शहर के कोतवाली इलके के फीलखाना रेती स्ट्रीट के निवासी उवैद कुरैशी के मेडिकल स्टोर पर लगभग एक महीने पहले सर्विलांस टीम ने धावा बोला था. पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान छिपाकर खुद को ड्रग विभाग का उड़न दस्ता बताया और संचालक पर प्रतिबंधित नशीली दवाएं बेचने का संगीन आरोप मढ़ दिए.

40 हजार लेने के बाद व्यपारी को छोड़ा

मौके पर पहुंची टीम ने साक्ष्यों को मिटाने के इरादे से स्टोर में लगे सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और डीवीआर भी अपने साथ ले गई. इसके बाद उवैद को जबरन हिरासत में लिया गया था. डरे हुए व्यापारी को छोड़ने के लिए शुरुआती मांग एक लाख रुपये की रखी गई थी, लेकिन काफी देर चली सौदेबाजी के बाद मामला 40 हजार रुपये पर तय हुआ था. रकम मिलते ही पुलिस ने उवैद को छोड़ दिया था, जिसके बाद पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर अपने अधिवक्ता भाई के माध्यम से एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई थी.

सीओ को सौंपी गई थी जांच

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) को जांच सौंपी थी. जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और आस-पास के फुटेज से यह साबित हो गया कि सर्विलांस प्रभारी वीर बोस, सिपाही शिवम चिकारा, विपिन शर्मा, यश दहिया और मनोज यादव ने बिना किसी अधिकार के छापेमारी की थी. जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही एसएसपी ने पांचों आरोपियों को सस्पेंड कर दिया है.

अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जनता का शोषण करने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा. अब इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के जरिए सख्त कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है. ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

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