• Home
  • Breaking News
  • बैसाखियों पर काटी जिंदगी, जेब में उधार के पैसे; फिर भी खड़ा किया हजारों करोड़ का रिटेल कारोबार
Image

बैसाखियों पर काटी जिंदगी, जेब में उधार के पैसे; फिर भी खड़ा किया हजारों करोड़ का रिटेल कारोबार

एक समय छोटी-सी दुकान से कारोबार शुरू करने वाले रामचंद्र अग्रवाल ने पहले विशाल मेगा मार्ट की नींव रखी और बाद में परिस्थितियों के कारण इसे बेच दिया। इसके बाद उन्होंने वी2 रिटेल की शुरुआत की, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक खड़ा किया। आज वी2 रिटेल का बाजार पूंजीकरण लगभग 6,530 करोड़ रुपये है।भारतीय रिटेल जगत में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल ब्रांड नहीं, बल्कि संघर्ष और संकल्प की पहचान बन जाते हैं। विशाल मेगा मार्ट भी ऐसा ही एक नाम है, जिसने मध्यमवर्गीय परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को किफायती दामों पर पूरा कर अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन इस चमकते ब्रांड के पीछे एक कहानी छिपी है। इस कहानी के नायक हैं रामचंद्र अग्रवाल। एक ऐसे उद्यमी, जिन्होंने न तो किसी बड़ी डिग्री का सहारा लिया और न ही किसी मजबूत आर्थिक या सामाजिक समर्थन का। महज चार साल की उम्र में पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद रामचंद्र अग्रवाल ने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। बैसाखियों के सहारे चलते हुए उन्होंने एक छोटी गारमेंट शॉप से शुरुआत की और विशाल मेगा मार्ट जैसा बड़ा ब्रांड खड़ा किया। कुछ गलत फैसलों के कारण यह कारोबार बेचना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने अनुभव और हौसले से उन्होंने वी2 रिटेल की नई शुरुआत की, जो आज देशभर में 150 से अधिक स्टोर के साथ तेजी से बढ़ता रिटेल ब्रांड है। उनकी कहानी साबित करती है कि असफलता अंत नहीं, नई शुरुआत होती है।बचपन में पोलियो ने रोकी चाल
रामचंद्र अग्रवाल का जन्म 1965 में कोलकाता के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। 650 वर्ग फीट के घर में उनके परिवार के 20 लोग रहते थे और घर की आर्थिक हालत कमजोर थी। कई बार घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता था। चार साल की उम्र के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिससे वे जीवन भर के लिए विकलांग हो गए और उन्हें चलने के लिए बैसाखियों का सहारा लेना पड़ा। इसके बावजूद उनके भीतर कुछ अलग करने की चाह हमेशा बनी रही। 17 साल की उम्र से उन्होंने डायरी लिखनी शुरू की, जिसमें वे अपनी जिंदगी और समाज को बेहतर बनाने के सपने और योजनाएं लिखते थे। उन्हें समझ आ गया था कि इन सपनों को पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत है। इसीलिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और अपने खर्च निकालने लगे। कॉमर्स में ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने लॉ कॉलेज में दाखिला लिया और साथ ही एक पार्ट-टाइम नौकरी भी की, जहां 300 रुपये महीने की सैलरी मिलती थी। जल्द ही उन्होंने नौकरी छोड़कर उधार लेकर फोटोकॉपी और सॉफ्ट ड्रिंक की दुकानें शुरू कीं। भले ही ये सफल न रहीं, लेकिन यहीं से उनके उद्यमी सफर की शुरुआत हुई।


बाजार में बनाई मजबूत साख
उन्होंने कोलकाता में छोटी रेडीमेड कपड़ों की दुकान विशाल गारमेंट्स से शुरुआत की और इसे 15 वर्षों तक सफलतापूर्वक चलाया। कुछ वर्षों में इसका नाम कोलकाता में लोकप्रिय होने लगा। उन्होंने स्थानीय व्यवसायों और दुकानों को कपड़े बेचकर बाजार में अपनी मजबूत साख बनाई। इसके बाद फैब्रिक के व्यवसाय में भी उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। रामचंद्र अग्रवाल ने महसूस कर लिया था कि आने वाले समय में मल्टीस्टोर्स का दौर आएगा, जहां राशन से लेकर कपड़े और सब्जी-भाजी, सब कुछ एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2001-02 में दिल्ली में विशाल मेगा मार्ट की शुरुआत की। उन्होंने खास ध्यान रखा कि कीमतें मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के लिए किफायती हों।


जब बेचनी पड़ी कंपनी
2007-08 तक विशाल मेगा मार्ट के 18 राज्यों में 50 से ज्यादा स्टोर खुल चुके थे। उन्होंने अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग भी शुरू की, यानी कपड़े अपनी फैक्टरी में बनाकर अपने ही स्टोर्स में बेचे, जिससे मुनाफा बढ़ने लगा। लेकिन तेजी से बढ़ाने की यह कोशिश उनके लिए भारी पड़ गई। एक के बाद एक स्टोर और फैक्टरियां खुलती गईं, जिसके लिए बाजार से बहुत ज्यादा कर्ज लेना पड़ा। इसी बीच वैश्विक मंदी आई और विशाल मेगा मार्ट भारी घाटे में चला गया। कंपनी को करीब 750 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। हालात इतने खराब हो गए कि रामचंद्र अग्रवाल को दिवालियापन के लिए आवेदन करना पड़ा। मजबूरी में उन्हें ‘विशाल’ ब्रांड, जिसकी कीमत करीब 2000 करोड़ रुपये मानी जाती थी, सिर्फ 70 करोड़ रुपये में श्रीराम ग्रुप और टीपीजी कैपिटल को बेचना पड़ा।


वी2 रिटेल के साथ वापसी
जब विशाल का कारोबार खत्म माना जा रहा था, तब रामचंद्र अग्रवाल ने बची पूंजी और 10 करोड़ रुपये के कर्ज से वी2 रिटेल लिमिटेड की शुरुआत की। पिछली गलतियों से सीख लेकर उन्होंने कारोबार को अनुशासित और आम ग्राहकों पर केंद्रित बनाया। आज वी2 रिटेल भारत के सबसे तेजी से बढ़ते रिटेल ब्रांड्स में से एक है। वी2 रिटेल अब एक सूचीबद्ध कंपनी है और 2025 तक इसका बाजार पूंजीकरण लगभग 6,530 करोड़ रुपये है। विशाल मेगा मार्ट को बेचने की मजबूरी के बावजूद, रामचंद्र अग्रवाल ने एक और सफल रिटेल चेन खड़ी करके अपनी व्यावसायिक समझ साबित की।

Releated Posts

कौशाम्बी की जनता के जीवन स्तर में सुधार लाना मेरा उद्देश्य।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य

Nayer Azam /कौशाम्बी। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी ने आज जनपद कौशाम्बी स्थित…

पूर्वांचल विश्वविद्यालय दी अंतिम चेतावनी:एक लाख छात्रों के परिणाम लंबित, 25 मार्च तक अंक अपलोड करने का निर्देश

अरविन्द कुमार पटेल/वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने गाजीपुर और जौनपुर के संबद्ध महाविद्यालयों की लापरवाही पर कड़ा…

पुलिस बल तैनात:मछलीशहर के ईदगाह और मस्जिदों में अदा की गई ईद की नमाज़

अरविन्द कुमार पटेल/मछलीशहर में ईदगाह सहित अन्य मस्जिदों में ईद की नमाज़ अदा की गई। सुरक्षा के मद्देनज़र…

UP: हाईकोर्ट ने कहा- पांच माह से अधिक उम्र के गर्भस्थ शिशु को भी कानून की नजर में एक व्यक्ति माना जाएगा

राम नरायन पांण्डेय /हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि पांच माह से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top