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पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत की:मिडिल ईस्ट में हमलों की निंदा की, कहा- समुद्री रास्तों का खुला रहना बहुत जरूरी

Agency/अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 22वां दिन है। पीएम ने शनिवार को ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बातकर उन्हें ईद और नवरोज की बधाई दी। उन्होंने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर दी। पीएम ने लिखा- मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पजशकियान से बात की। हमने उम्मीद जताई कि इस त्योहार के समय मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता आए।मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में मिडिल ईस्ट में जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर (जैसे तेल, बिजली आदि) पर हो रहे हमलों की निंदा की, क्योंकि इससे इलाके की शांति और दुनिया की सप्लाई पर असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि समुद्री रास्ते खुले और सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है, ताकि व्यापार ठीक से चलता रहे। इसके साथ ही, ईरान में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा में मदद के लिए ईरान का धन्यवाद किया।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान युद्ध में साथ न देने पर NATO सहयोगी देशों पर नाराजगी जताई है। ट्रम्प ने कहा है कि NATO देश कायर हैं और अमेरिका के बिना यह गठबंधन सिर्फ कागजी शेर है।ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट का जिक्र करते हुए कहा कि इसे खुला रखने के लिए सैन्य मदद देना आसान है, लेकिन सहयोगी देश इसमें भी पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह बहुत आसान सैन्य कदम है, जिसमें बहुत कम जोखिम है, लेकिन वे मदद नहीं करना चाहते। कायर हैं, और हम इसे याद रखेंगे।”ईरान ने शुक्रवार सुबह हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के जॉइंट सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। CNN के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

उनके मुताबिक, ईरान ने 2 मिसाइलें दागीं, लेकिन कोई भी बेस को निशाना नहीं बना सकी। यह बेस ईरान के तट से लगभग 3810 किलोमीटर दूर है। तेहरान से इसकी दूरी 5 हजार किमी से भी ज्यादा है। डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद अहम सैन्य ठिकाना है। इस बेस से अमेरिका अपने बॉम्बर प्लेन का इस्तेमाल करता है। यहां बड़े टैंकर विमान (जैसे KC-135) और निगरानी करने वाले विमान भी काम कर सकते हैं।पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से फोन बात की और उन्हें ईद और नवरोज की बधाई दी।उन्होंने उम्मीद जताई कि इस त्योहार के समय पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में जरूरी जगहों पर हो रहे हमले गलत हैं, क्योंकि इससे हालात खराब होते हैं और दुनिया के व्यापार पर असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री रास्ते (जहाजों के रास्ते) सुरक्षित और खुले रहने चाहिए। साथ ही, भारत ने ईरान का धन्यवाद किया कि वहां रह रहे भारतीय लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है।ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला किया है।

उनका कहना है कि इस हमले से एयरपोर्ट का काम प्रभावित हुआ है। उड़ानें और सेना के विमानों में ईंधन भरने में दिक्कत आई है। हालांकि, अभी तक इस हमले की पुष्टि नहीं हुई है।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के लोगों को नवरोज की बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में रूस, ईरान के साथ खड़ा रहेगा और उसका सच्चा दोस्त है। रूस ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमलों से मिडिल ईस्ट में हालात खराब हो गए हैं और दुनिया में तेल का संकट बढ़ सकता है।साथ ही, रूस ने ईरान के नेता अली खामेनेई की हत्या को गलत बताया है। ईरान के सेना प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी के शव को लोगों के श्रद्धांजलि देने के लिए कोम लाया गया है।

बाद में उनका अंतिम संस्कार काशान में किया जाएगा। इससे पहले तेहरान में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई थी। उनकी मौत कल अमेरिका और इजराइल के हमले में हुई थी।ईरान से जुड़े एक हैकर ग्रुप ने कहा है कि उन्होंने इजराइल के बड़े सेना अधिकारी एरन ओरताल का ईमेल हैक कर लिया है।प्रेस टीवी के मुताबिक, हैकर ग्रुप ‘हंदाला’ का दावा है कि उन्हें करीब 1 लाख सीक्रेट ईमेल मिले हैं। इन ईमेल में इजराइल की सेना की योजनाओं से जुड़ी जानकारी है। ब्रिगेडियर जनरल एरन ओरताल पहले इजराइली सेना में बड़े पद पर रह चुके हैं और अब एक यूनिवर्सिटी में काम कर रहे हैं। फिलहाल, इस हैकिंग के दावे की कोई पक्की पुष्टि नहीं हुई हैडोनाल्ड ट्रम्प लगातार नाटो और अन्य देशों से होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने में मदद करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि नाटो देश सिर्फ तेल की महंगाई की शिकायत करते हैं, लेकिन मदद करने आगे नहीं आते।

ट्रम्प ने इन देशों को ‘कमजोर’ भी कहा और उनसे कहा कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी सबको मिलकर उठानी चाहिए। पिछले एक हफ्ते से ट्रम्प बार-बार अलग-अलग देशों से मदद मांग रहे हैं और उन पर दबाव बना रहे हैं। अमेरिका अब चाहता है कि वह अकेले जिम्मेदारी न उठाए, बल्कि बाकी देश भी इसमें उसका साथ दें।

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