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जागरूकता का संदेश देने के लिए गांव और कस्बों में घूमा बाल विवाह मुक्ति रथ

श्री राम प्रजापति
चित्रकूट। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले के गांवों व कस्बों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की यात्रा के समापन के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम में जन कल्याण शिक्षण प्रसार समिति ने कहा कि प्रयासों को मिली प्रतिक्रिया से आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त चित्रकूट और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करते के बेहद करीब हैं। जन कल्याण शिक्षण प्रसार समिति बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है।
जिले में बाल विवाह मुक्ति रथ को सांसद कृष्णा देवी पटेल’ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। 30 दिनों में बाल विवाह मुक्ति रथ ने पूरे जिले के प्रमुख स्थलों की यात्रा की। यह रथ 75 गांवों तक पहुंचा और हजारों लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा। रथ ने जिले के तमाम गांवों और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। प्रमुख सड़कों और बेहतर पहुंच वाले मार्गों से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ गुजरा। जबकि संपर्क के लिहाज से मुश्किल सुदूर गांवों तक बाइक व साइकिल कारवां के जरिए पहुंचा गया। ताकि बाल विवाह मुक्त चित्रकूट का संदेश सबसे आखिरी छोर तक पहुंच सके। जन कल्याण शिक्षण प्रसार समिति के सचिव शंकर दयाल ने बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था। जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह अभियान एक व्यापक जन भागीदारी वाले जन अभियान में तब्दील हो गया। तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इंकार करें। साथ ही, कैटरर्स, सजावट वालों, बैंक्वेट हाल मालिकों व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड वालों, घोड़ी वालों से संपर्क कर अनुरोध किया गया कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं नहीं दें। तीसरे चरण में जिले की पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कर्वी ब्लॉक के ग्राम पंचायत खोह में कैंडिल मार्च निकाल कर कार्यक्रम का समापन किया गया।

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