
Devraj Singh
पटना की ठंडी सुबह में आज एक अजीब सी बेचैनी है. करीब दो दशक तक बिहार की धड़कन रहे नीतीश कुमार अब अपनी पारी समेटने के मूड में हैं. गिरता स्वास्थ्य और केंद्र की राजनीति में बढ़ती भूमिका के बीच, यह लगभग तय माना जा रहा है कि ‘सुशासन बाबू’ अब बिहार विधानमंडल से निकलकर दिल्ली की राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाएंगे. लेकिन सवाल यह नहीं है कि नीतीश जा रहे हैं, सवाल यह है कि पीछे किसे छोड़कर जा रहे हैं? क्या भाजपा का मुख्यमंत्री होगा या नीतीश अपने बेटे निशांत कुमार को ‘उत्तराधिकारी’ के रूप में प्रोजेक्ट करेंगे?5 दावेदारों में अगला मुख्यमंत्री कौन? (Who Will Bihar Next CM)
बिहार की राजनीति आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है, जहां से राज्य की सत्ता का पूरा समीकरण हमेशा के लिए बदल सकता है. लंबे समय से चल रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के राज्यसभा जाने की अटकलों पर आज पूर्ण विराम लगने की संभावना है. आइये इससे पहले उन 5 नामों के बारे में चर्चा करते हैं जो मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे हैं.
सम्राट चौधरी (भाजपा): सबसे प्रबल दावेदार हैं. यदि भाजपा मुख्यमंत्री पद अपने पास रखती है, तो सम्राट पहली पसंद होंगे.
- वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर ओबीसी (कुशवाहा) चेहरा
- संगठन पर मजबूत पकड़ और आक्रामक राजनीति
- भाजपा के उस विजन में फिट बैठते हैं जहां पार्टी अब बिहार में अपने दम पर ‘बड़ा भाई’ बनना चाहती है
नित्यानंद राय (भाजपा): प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की सीधी पसंद होने के कारण उनका नाम अचानक चौंका सकता है.
- केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के भरोसेमंद सिपहसालार
- वे इस रेस के ‘डार्क हॉर्स’ हैं.
- यादव समुदाय से आने वाले राय भाजपा के लिए लालू-तेजस्वी के वोट बैंक में सेंध लगाने का सबसे बड़ा हथियार हैं.
विजय कुमार सिन्हा (भाजपा): यदि पार्टी किसी अनुभवी और संतुलित चेहरे पर दांव लगाना चाहेगी, तो सिन्हा का दावा मजबूत होगा.
- वर्तमान उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष
- सवर्ण (भूमिहार) मतदाताओं के बीच गहरी पैठ और संसदीय प्रक्रियाओं का लंबा अनुभव
- नीतीश के साथ सरकार चलाने के अभ्यस्त हैं
दिलीप जायसवाल (भाजपा): गठबंधन की जटिलताओं के बीच एक ‘सर्वमान्य चेहरे’ के रूप में उभर सकते हैं.
- बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष है. ऐसे में संगठन में उन की गहरी पैठ है
- सीमांचल-कोसी क्षेत्र के दिलीप जायसवाल प्रभावशाली नेता माने जाते हैं
- शांत स्वभाव और संगठन को साथ लेकर चलने की क्षमता
- वे वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भाजपा का कोर वोट बैंक है
संजीव चौरसिया (भाजपा): युवा वोटरों (Gen-Z) को लुभाने के लिए भाजपा उन्हें डिप्टी सीएम या किसी बड़ी भूमिका में ला सकती है. बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के साथ भाजपा किसी युवा नेतृत्व को आगे कर सकती है
पटना के दीघा से विधायक और युवा चेहरा वे भाजपा के कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं I


















