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लखनऊ मानवेंद्र हत्याकांड : पुलिस रिमांड में भेजा गया आरोपी बेटा, जानिए क्या बोले पड़ोसी

Govind Prajapati

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पिता की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या करने, शव के टुकड़े करने और धड़ को ड्रम में छिपाने के लिए 21 साल के एक युवक को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अपर पुलिस उपायुक्त (मध्य) जितेंद्र कुमार दुबे ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि आरोपी अक्षत सिंह से पूछताछ की जा रही है। 

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दुबे ने बताया, “प्रथम दृष्ट्या ऐसा लगता है कि अक्षत ने पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए बार-बार कहने और नीट पास करने को लेकर दबाव डालने की वजह से अपने पिता की हत्या की। हालांकि पूछताछ जारी है और मामले की जांच जारी है।” पुलिस उपायुक्त (मध्य) विक्रांत वीर ने बताया कि अक्षत ने 20 फरवरी को तड़के करीब साढ़े चार बजे अपने पिता मानवेंद्र सिंह (50) की आपसी विवाद के बाद कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी। 

उन्होंने बताया कि बाद में आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश में शव के हाथ-पैर काट दिए और उन्हें लखनऊ में अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया जबकि धड़ को अपने घर के में रखे एक ड्रम के अंदर छिपा दिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने जुर्म कबूल कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर लिया गया है।

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उन्होंने बताया कि फोरेंसिक की एक टीम ने मौके से सुबूत इकट्ठा किए और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। वहीं मानवेंद्र सिंह के पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि यह सोचा भी नहीं जा सकता कि बेटा ऐसा काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि 20 फरवरी के बाद जब परिवार ने दावा किया कि मानवेंद्र लापता हो गये हैं तो स्थानीय लोग उनके साथ पुलिस के पास गए। 

पड़ोसी ने बताया कि अक्षत ने उन्हें कथित तौर पर बताया था कि उसने पहले ही शिकायत दर्ज करा दी है और पुलिस के संपर्क में है, जिससे उनका शक दूर हो गया। मानवेंद्र सिंह के भाई ने कहा कि उन्हें अपने भतीजे पर कभी शक नहीं हुआ। उन्होंने एक टेलीविजन चैनल से बात करते हुए कहा कि उन्होंने 20 फरवरी की शाम को अपने भाई को फोन किया था लेकिन उसका फोन बंद था। 

मृतक के भाई ने कहा, “जब मैंने अपने भतीजे से बात की, तो उसने मुझे बताया कि उसके पिता जरूरी काम से दिल्ली गए हैं और दो दिन में लौटेंगे। अगले दिन भी उसके सभी फोन बंद थे जिससे मुझे शक हुआ। मैं घर गया और पूछा लेकिन कभी नहीं सोचा था कि अक्षत इसमें शामिल हो सकता है।” 

परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने कहा कि मानवेंद्र सिंह के चार पैथोलॉजी सेंटर व शराब की तीन दुकानें थीं और वह आर्थिक रूप से खासे मजबूत थे। मानवेंद्र के भाई ने कहा कि उन्हें अक्षत पर किसी भी तरह के बहुत ज्यादा पढ़ाई के दबाव के बारे में पूरी तरह से पता नहीं था।  

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