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महिलाओं में “वाइन, साइन्स एंड डिवाइन” सत्र में ज्योतिष के प्रति दिखा उत्साह

लखनऊ, 17 फरवरी, 2026। फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर ने लखनऊ के निशातगंज स्थित मेट्रो सिटी सेंटर के सफायर सुइट्स में डॉ. शीतल शपारिया के साथ “वाइन, साइन्स एंड डिवाइन” शीर्षक से एक खास और दिलचस्प सत्र होस्ट किया।
डॉ. शीतल शपारिया ने इस कार्यक्रम में फ्लो सदस्यों को वाइन रीडिंग की कला से परिचित कराया गया। इसमें कैनवस पर वाइन से बने पैटर्न को किसी की पर्सनैलिटी और लाइफ जर्नी के बारे में इनसाइट बताने के लिए इंटरप्रेट किया जाता है। फिर पार्टिसिपेंट्स ने अपने इंप्रेशन को एक्सप्रेसिव आर्टवर्क में बदला, जिससे उनके अंदर के सिंबॉलिक रिफ्लेक्शन बने। डॉ. शीतल शपारिया ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि वाइन रीडिंग या ओएनोमेंसी भविष्यवाणी की एक प्राचीन पद्धति है जिसमें वाइन पीने के बाद गिलास में बचे लाल वाइन के तलछट में मौजूद पैटर्न का विश्लेषण करके व्यक्ति, रिश्तों और भविष्य के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। ग्रीक और रोमन परंपराओं से जुड़ी इस प्रक्रिया में, मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए अवशेष के आकार, रंग और सुगंध का विश्लेषण किया जाता है।
“वाइन रीडर,” इन आकृतियों को साधक के जीवन के पहलुओं के प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व के रूप में व्याख्या करते हैं।
उन्होंने कहा कि कौन सोचेगा कि ग्लास में बची हुई वाइन से छिपी हुई पर्सनैलिटी की खासियतें, रोमांटिक रिश्तों की समझ, करियर में सफलता और भविष्य में क्या होने वाला है, यह पता चल सकता है, लेकिन वाइन रीडिंग असल में भविष्यवाणी का एक पुराना तरीका है जिसका इस्तेमाल भविष्य बताने के लिए किया जाता है। यह पुराने रोम के समय में बहुत प्रसिद्ध कला थी लेकिन हाल ही में इसे कुछ खास ज्योतिषियों ने फिर से अपना लिया है।
वाइन रीडिंग के इतिहास के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत भी ड्रिंक की तरह ही रहस्यमयी है। यह बात पुराने ग्रीस और रोम से शुरू होती है, जब देवताओं को चढ़ावे के तौर पर वाइन चढ़ाई जाती थी, इस उम्मीद में कि वे एक अच्छा भविष्य पक्का करेंगे। पुराने ग्रीस में वाइन को डायोनिसस से जोड़ा जाता था, जो मौज-मस्ती के देवता थे और ‘एपिफेनी’ के रूप में प्रेरणा देते थे। डायोनिसस के जैसे ही बैकस थे जो वाइन और दिव्य उन्माद के रोमन देवता थे। बैकस खुद ज़िंदा और मरे हुए लोगों के बीच एक दिव्य कम्युनिकेटर के तौर पर काम करते थे। रोम में वाइन रीडिंग की कला पारंपरिक रूप से पुजारिन बैकान्टे करती थीं।इस सेशन में क्रिएटिविटी, आत्मनिरीक्षण और सार्थक बातचीत का एक अच्छा मेल था, जिससे यह फ्लो लखनऊ के लिए एक खास शाम बन गई संचालन शमा गुप्ता ने किया।
कार्यक्रम में फिक्की फ्लो लखनऊ की चेयरपर्सन वंदिता अग्रवाल,सिमरन साहनी, स्वाति वर्मा, विभा अग्रवाल, देवांशी सेठ, वनिता यादव, नेहा सिंह,स्मृति गर्ग सहित 150 से अधिक फ्लो सदस्य मौजूद थे।

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