LV-News लखनऊ/आज़मगढ़। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने किसान नेता राजीव यादव के नेतृत्व में निजामाबाद क्षेत्र में संपर्क संवाद कार्यक्रम चलाया। इस दौरान मंझारी, भानीपुर से सोफीपुर, करियाबर, भीरू की पुलिया से मेढ़ी, दादरा, टीकापुर, सहनूपुर, खरकौली, लक्षेहरा, कौड़िया होते हुए गुजरने वाली सभी मुख्य नहरों और उनकी शाखाओं का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि किसी भी नहर में पानी नहीं है। जिले की अन्य नहरों की भी लगभग यही स्थिति है।
जुलाई का महीना शुरू हो चुका है और रोपाई का कार्य पूरी गति से चलना चाहिए था, लेकिन नहरों में पानी न होने के कारण किसान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। सामान्य से कम वर्षा के कारण इस बार किसान पूरी तरह नहर के पानी पर निर्भर हैं।
सोशलिस्ट किसान सभा महासचिव राजीव यादव, पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव वीरेन्द्र यादव, अवधेश यादव ने कहा कि धान की रोपाई के इस महत्वपूर्ण समय में तत्काल सभी नहरों में पानी छोड़ा जाए, ताकि किसान समय से रोपाई का कार्य पूरा कर सकें। यदि एक सप्ताह के अंदर सभी नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
नहरों की हालत यह है कि जगह-जगह नहरों में खरपतवार और झाड़-झंखाड़ उग गए हैं। सफाई ठीक से न होने के कारण पानी की सप्लाई बाधित रहेगी। इससे स्पष्ट है कि सिंचाई विभाग की मंशा किसानों को पानी देने की नहीं है। यदि नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसानों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा।
आजमगढ़ के पश्चिमी छोर से प्रतापपुर पवई होते हुए जाने वाली नहर पूरी तरह सूखी पड़ी है। इसी तरह करौजा, आंधीपुरा, अंबारी और फूलपुर से जाने वाली नहर का भी यही हाल है।
लगातार महंगाई की मार झेल रहे किसान अपनी खेती-किसानी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसानों ने भयंकर गर्मी और हीट वेव के बीच सुबह-शाम सिंचाई करके किसी तरह धान की नर्सरी तैयार की है। अब रोपाई का समय है।
एक तरफ डीजल महंगा हो गया है। डीजल-पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर सप्लाई की जा रही है, जिससे वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं और एवरेज कम मिल रहा है। इससे जुताई का खर्च बढ़ गया है। वहीं दूसरी तरफ नहरों में पानी न आने के कारण धान की रोपाई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
किसानों की समस्याओं को समझने और उनके साथ खड़े होने के लिए संपर्क संवाद कार्यक्रम लगातार जारी रहेगा। सरकार को किसानों की पीड़ा को गंभीरता से लेना होगा।
















