• Home
  • Health
  • अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ की टीम की बड़ी उपलब्धि

अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ की टीम की बड़ी उपलब्धि

लखनऊ 21 फ़रवरी 2026: अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ न्यूरो-इंटरवेंशनल प्रक्रिया इंट्राक्रेनियल कैथेटर डायरेक्टेड थ्रोम्बोलाइसिस कर ढाई साल की बच्ची की जान बचाई। यह उन्नत मस्तिष्क प्रक्रिया उत्तर प्रदेश में पहली बार की गई। इस प्रक्रिया को इंटरवेंशनल न्यूरो-रेडियोलॉजिस्ट डॉ. देवांश मिश्रा ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी टीम के डॉ. अर्पित टौंक और डॉ. अमोल श्रीवास्तव के साथ मिलकर पूरी की।
बच्ची को अचानक बेहोशी, हाथ-पैरों में लकवा जैसे लक्षण और बार-बार बेहोश होने की स्थिति में गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। आपातकालीन जांच में एमआरआई, सीटी स्कैन और एंजियोग्राफी से मस्तिष्क की गहरी शिरा में ख़ून का थक्का पाया गया। इस स्थिति को सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस कहा जाता है, जो समय पर उपचार न मिलने पर गंभीर मस्तिष्क को गहरे नुक़सान या मृत्यु का कारण बन सकती है।बाल रोग विभाग की टीम ने प्रारंभ में स्टैंडर्ड इलाज शुरू किया। जिसमें डॉ. सिद्धार्थ कुँवर, डॉ. सिद्धार्थ और डॉ. निशांत गोपाल शामिल रहे। लेकिन स्थिति की गंभीरता और सीमित सुधार को देखते हुए चिकित्सकों ने इंट्राक्रेनियल कैथेटर डायरेक्टेड थ्रोम्बोलाइसिस करने का फ़ैसला लिया। इतनी कम उम्र के मरीज में यह प्रक्रिया बेहद दुर्लभ मानी जाती है।प्रक्रिया के दौरान पैर में एक छोटा छेद कर सूक्ष्म कैथेटर डाला गया और उसे रक्त वाहिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क की प्रभावित गहरी शिरा तक सावधानीपूर्वक पहुंचाया गया। इसके बाद थक्का घोलने वाली दवा सीधे उसी स्थान पर दी गई। चार दिनों तक लगातार निगरानी के साथ सीटी स्कैन और एंजियोग्राफी की गई, जिसके बाद थक्का पूरी तरह घुल गया।इसके बाद बच्ची को इंटेंसिव केयर में रखा गया, धीरे-धीरे वेंटिलेटर से हटाया गया और विशेष चिकित्सा देखरेख जारी रही। लगभग तीन सप्ताह के उपचार के बाद उसे स्थिर अवस्था में छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में वह चलने, बोलने और सामान्य दैनिक गतिविधियां करने में सक्षम है।
डॉ. देवांश मिश्रा ने कहा, “मस्तिष्क की गहरी शिराओं में ख़ून का थक्का बनना बच्चों में अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति होती है। इस प्रकार की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा लिटरेचर में भी बहुत कम दर्ज है और उत्तर प्रदेश में यह पहला मामला है।”
उन्होंने आगे बताया, “बच्ची एपीएलए सिंड्रोम से ग्रसित थी, जो एक आनुवंशिक स्थिति है और इसमें ख़ून के थक्के बनने की प्रवृत्ति अधिक होती है। संक्रमण और डिहाइड्रेशन के कारण स्थिति और बिगड़ गई। समय पर हस्तक्षेप न किया जाता तो उसे बचाना संभव नहीं था।”
देश में दर्ज पीडियाट्रिक स्ट्रोक का यह पहला मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। इस जटिल और चुनौतीपूर्ण केस को 12 से 15 मार्च तक कोच्चि में आयोजित इंडियन नेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस 2026 में प्रस्तुत किया जाएगा। इस सम्मेलन में देशभर से आए वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट और स्ट्रोक विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे और स्ट्रोक उपचार की नई पद्धतियों, जटिल मामलों के प्रबंधन तथा ताजा शोध पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने इसे उन्नत न्यूरो-इंटरवेंशनल देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि सबसे जटिल उपचार भी सुरक्षित, सुलभ और असरदार रूप से उपलब्ध हों। इस दुर्लभ प्रक्रिया की सफलता दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।”

Releated Posts

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है नींबू, जानिए इसके 5 प्रमुख फायदे

Rita Kumariनींबू एक ऐसा फल है, जो न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ…

वेजिटेल सेफ कलर बना केमिकल-मुक्त हेयर केयर के लिए लोगों की पहली पसंद

LV-News लखनऊ, 2 जुलाई 2026, ऐसा हेयर कलर ढूंढना जो सुरक्षित भी हो और अच्छे नतीजे भी दे,…

स्मार्ट डिजिटल क्लिनिक की दूसरी शाखा शुरू

विजय कुमार यादव/ प्रयागराज। संगम नगरी में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए…

कोल्ड कॉफी भी हो सकती है हेल्दी: वजन घटाने के लिए अपनाएं ये तरीके

लखनऊ वार्ता -न्यूज़ कोल्ड कॉफी का स्वाद हर किसी को भाता है और गर्मी में इसे पीने का…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top