दिनेश प्रजापति प्रभारी मऊ
मऊ जिले में वर्ष 2019 में लेखपाल की हत्या करने के मामले में कोर्ट ने बाप-बेटे सहित चार को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-1 बाकर शमीम रिजवी की अदालत ने बुधवार को लेखपाल धीरज कुमार सिंह की हत्या के मामले में जगरनाथ और उसके बेटे विनोद कुमार, मनोज राम,हरिभवन यादव को दोषी करार दिया। अदालत ने सभी दोषियों को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर दोषियों को छह-छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। मामले में दोषी जगरनाथ का दूसरा बेटा सोनू उर्फ राहुल भी नामजद था लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो गई। मामला फरवरी 2019 का है। शहर कोतवाली क्षेत्र के बुद्ध बिहार कॉलोनी सहादतपुरा में लेखपाल धीरज कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। अभियोजन के मुताबिक, कोतवाली घोसी क्षेत्र के अरियासो गांव की मूल निवासी और वर्तमान में शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला बुद्ध बिहार, सहादतपुरा की रीता सिंह की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पत्नी के किचन में जाते ही चलाई थी गोली रीता ने पुलिस को बताया था कि पति धीरज कुमार सिंह सदर तहसील में लेखपाल थे। 11 फरवरी 2019 को धीरज शाम करीब पांच बजे घर आए। इसके बाद पांच व्यक्ति आए। पति ने चाय बनाने को कहा तो किचन में चली गई। इसी दौरान गोली की आवाज सुनाई दी तो भागकर ड्राइंग रूम में पहुंचीं। देखा कि पांचों व्यक्ति ड्राइंग रूम से बाहर निकल रहे थे। गोली मारने के बाद पति को गाली दे रहे थे। गोली लगने से पति की मौत हो गई। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। पुलिस की जांच में सामने आया था इनका नाम
पुलिस की विवेचना में सरायलखंसी थाना क्षेत्र के छोटी रस्तीपुर निवासी विनोद कुमार, सोनू उर्फ राहुल और उसके पिता जगरनाथ, मनोज राम, नसोपुर गांव निवासी हरिभवन यादव उर्फ छन्नू यादव, पखईपुर गांव निवासी अरविंद सिंह पुत्र बसावन सिंह और कैथवली गांव निवासी रमेश सिंह उर्फ काका का नाम सामने आया। पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष लोक अभियोजक ने आठ गवाह पेश किए और मजबूती से पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है।
हत्या, हत्या की साजिश और बलवा के मामलों में सुनाई सजा
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रमेश सिंह काका और अरविंद सिंह को संदेह का लाभ देते हुए आरोप मुक्त कर दिया। सुनवाई के दौरान दोषी जगरनाथ के दूसरे बेटे सोनू उर्फ राहुल मौत हो गई इसलिए उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। मुकदमा समाप्त कर दिया। वहीं, मामले में दोषी जगरनाथ, विनोद कुमार, मनोज राम और हरिभवन यादव उर्फ छन्नू यादव को बलवा, हत्या का दोषी करार दिया गया। सभी को हत्या के मामले में आजीवन कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही हत्या की साजिश रचने मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ 15-15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
















