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जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम का आयोजन

लखनऊ। Institute of Women and Gender Studies द्वारा कुलपति Prof. Saini के कुशल नेतृत्व में “K(NO)W BIAS: A Sensitivity Shift” शीर्षक से जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में लैंगिक समानता, संवेदनशीलता, गरिमा एवं समावेशी दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता विकसित करना था।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि Prof. Amita Kannaujia ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें प्रत्येक व्यक्ति के साथ हर स्तर और हर स्थान पर समानता एवं सम्मान का व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण में पारस्परिक सम्मान के महत्व पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि एवं रिसोर्स पर्सन Prof. Rakesh Chandra ने कहा कि हमें जेंडर सेंसिटिव बनने तथा जेंडर बायस को समाप्त करने की आवश्यकता है। इसके लिए केवल सोच में ही नहीं बल्कि संस्थागत ढांचे एवं आधारभूत संरचनाओं में भी परिवर्तन आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि University of Lucknow में मिशन शक्ति के विभिन्न चरणों के अंतर्गत जेंडर सेंसिटिविटी के स्तर पर महत्वपूर्ण सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं और आशा व्यक्त की कि विद्यार्थी इन मूल्यों को अपने घरों तथा भविष्य के जीवन में भी आगे बढ़ाएंगे।

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट Balendra Tiwari ने विद्यार्थियों के साथ प्रभावशाली प्रस्तुति एवं रोचक गतिविधियों का आयोजन किया, जिनके माध्यम से उन्होंने संवेदनशीलता, सहानुभूति एवं समावेशी व्यवहार के महत्व को समझाने का प्रयास किया।
Dr. Manini Srivastava, समन्वयक, इंस्टिट्यूट ऑफ वीमेन एंड जेंडर स्टडीज़ एवं नोडल अधिकारी मिशन शक्ति ने कहा कि जेंडर सेंसिटिव व्यक्ति वही होते हैं जो एक-दूसरे की गरिमा का सम्मान करते हैं तथा प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्टता को स्वीकारते और उसका उत्सव मनाते हैं।

कार्यक्रम में पर्णिका , आरती और तनु द्वारा सुंदर गीत एवं रुनझुन द्वारा नृत्य प्रस्तुतियाँ भी दी गईं, जिन्होंने कार्यक्रम को अत्यंत जीवंत एवं उत्साहपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन वाणी शुक्ला द्वारा किया गया। स्वयंसेवकों में Agrima एवं Amollika प्रमुख रूप से शामिल रहे, जिनके सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

साथ ही कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के सभी विभागों में “शक्ति दूत” नियुक्त किए जाने की पहल की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि छात्राओं में से समर्पित स्वयंसेविकाओं को शक्ति दूत के रूप में नामित किया जाएगा, जो विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन/स्थानीय सुरक्षा तंत्र के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेंगी।

ये शक्ति दूत छात्राओं को बिना झिझक अपनी समस्याएँ एवं उत्पीड़न संबंधी शिकायतें साझा करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी, “चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो” अभियान को बढ़ावा देंगी तथा परिसर में सुरक्षित एवं सहयोगात्मक वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। साथ ही वे छात्राओं को उपलब्ध कानूनी सहायता एवं 24×7 महिला हेल्पलाइन 1090 के संबंध में भी जागरूक करेंगी तथा गोपनीयता एवं संवेदनशीलता बनाए रखेंगी।

यह भी घोषित किया गया कि विभिन्न विभागों में नियुक्त सभी शक्ति दूतों को Institute of Women and Gender Studies द्वारा जेंडर सेंसिटिविटी, संवाद कौशल एवं सहायक हस्तक्षेप से संबंधित औपचारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे विश्वविद्यालय में अधिक समावेशी, सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकें।

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