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उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ताजा समीक्षा रिपोर्ट ने विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े

लखनऊ वार्ता – न्यूज/उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ताजा समीक्षा रिपोर्ट ने विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक की अवधि में प्रदेशभर में 1671 चालक ऐसे पाए गए, जिन्होंने एक भी किलोमीटर बस नहीं चलाई, फिर भी वेतन लेते रहे। इसके साथ ही 1069 परिचालक भी ‘शून्य किमी’ श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा महज लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, क्योंकि एक ओर बसों के संचालन में स्टाफ की कमी बताई जाती रही, वहीं दूसरी ओर हजारों कर्मचारी काम ही नहीं कर रहे हैं।

समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि कई क्षेत्रों में चालक और परिचालकों की कमी के चलते बस सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कई रूट्स पर बसें समय पर नहीं चल पा रहीं या सेवाएं कम करनी पड़ रही हैं। इसके उलट बड़ी संख्या में चालक-परिचालकों को कार्यालय, स्टाफ कार संचालन और अन्य गैर-परिवहन कार्यों में लगा दिया गया, जिससे संचालन व्यवस्था असंतुलित हो गई। इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक ‘0 किलोमीटर’ वाले चालकों का प्रतिशत करीब 50% तक पहुंच गया है, जबकि परिचालकों में यह आंकड़ा 34% है। इतनी बड़ी संख्या में नियमित स्टाफ का बस संचालन से बाहर रहना न केवल निगम के लिए आर्थिक नुकसान है, बल्कि इससे उसकी सेवा की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। मुख्यालय की ओर से पहले भी निर्देश जारी किए गए थे कि नियमित (सक्षम) चालक और परिचालकों को बस संचालन में ही लगाया जाए। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हुआ। कई स्थानों पर चालक-परिचालकों को पूरी तरह अन्य कार्यों में लगा दिया गया, जिससे संचालन व्यवस्था कमजोर होती चली गई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन निगम मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चालक और परिचालकों से बस संचालन के अलावा कोई अन्य कार्य न लिया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि उन्हें कार्यालय या सहायक कार्यों में लगाने की प्रवृत्ति तुरंत बंद की जाए और बस संचालन को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यालय ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 तक ‘0 किमी’ रहने वाले चालक और परिचालकों की नामवार सूची मांगी है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब सिर्फ समीक्षा तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

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