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राम नवमी का विश्वभर के हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक महत्व है-महंत विशाल गौड़

गोविन्द प्रजापति

लखनऊ, राम नवमी (संस्कृत: राम नवमी, रोमनकृत: रामनवमी) एक हिंदू त्योहार है जो हिंदू धर्म में पूजनीय देवता राम के जन्म का उत्सव मनाता है, राम जिन्हें विष्णु के सातवें अवतार के रूप में भी जाना जाता है। राम नवमी का विश्वभर के हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक महत्व है। राम नवमी की कथा इस बात की याद दिलाती है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर विजय प्राप्त करती है, जैसा कि भगवान राम की राक्षस राजा रावण पर विजय से स्पष्ट होता है, और यही कारण है कि राम नवमी मनाई जाती है। राम नवमी चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन है- ये नौ दिन देवी शक्ति के नौ रूपों को समर्पित हैं। यह त्योहार भगवान राम से भी जुड़ा हुआ है। इस दौरान प्रार्थना, झांकी, खाने-पीने की दुकानें, मेले आदि का आयोजन होता है। श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर चौक के महंत विशाल गौड़ ने बताया चैत्र नवरात्र-26 की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च शुक्रवार को होगा। नवरात्र के पहले दिन की शुरुआत 19 मार्च को कलश स्थापना से की जाएगी, जिससे मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत मानी जाती है
त्यौहार के पीछे का आध्यात्मिक तर्क
महंत ने बताया नवरात्रि मौसमी बदलावों से जुड़ी है, ऐसे क्षण जब प्रकृति में परिवर्तन होता है और पारंपरिक ज्ञान लोगों को अपनी दिनचर्या को सरल बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इन नौ दिनों के दौरान उपवास, प्रार्थना और अनुशासित जीवन जीने से शरीर और मन दोनों में संतुलन बहाल करने में मदद मिलती है। इस वर्ष दुर्गा अष्टमी और राम नवमी एक ही दिन यानी गुरुवार 26 मार्च को पड़ रही हैं। यह एक असाधारण और शक्तिशाली संयोग है। भक्तों को इस दिन दुर्गा अष्टमी पूजा और राम नवमी दोनों का आयोजन करना चाहिए।
चैत्र नवरात्रि की जड़ें हिंदू पौराणिक कथाओं में गहराई से निहित हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा द्वारा लगभग अजेयता का वरदान प्राप्त राक्षस राजा महिषासुर ने ब्रह्मांड में आतंक फैलाया था। इसके जवाब में, देवताओं ने देवी दुर्गा की रचना की, जिन्होंने नौ रातों तक महिषासुर से युद्ध किया और अंतत: दसवें दिन उसे पराजित किया। यह त्योहार देवी दुर्गा को समर्पित है, जिनकी नौ रूपों की पूजा नौ दिनों तक की जाती है। अंतिम दिन राम नवमी भी है, जो राम का जन्मदिन है। इसी कारण कुछ लोग इसे राम नवरात्रि भी कहते हैं। कई क्षेत्रों में यह त्योहार वसंत ऋतु की फसल कटाई के बाद पड़ता है, और अन्य क्षेत्रों में फसल कटाई के दौरान। चैत्र नवरात्रि 2026 का प्रारंभ 19 मार्च को हो रहा है, जिसमें मां दुर्गा पालकी पर आसीन होकर हाथी पर विदा होती हैं। माता की सवारी का अर्थ और इसके शुभ या अशुभ संकेतों के बारे में जानें। चैत्र नवरात्रि 2026 का प्रारंभ 19 मार्च को हिंदू नव वर्ष के उपलक्ष्य में हो रहा है। मां दुर्गा पालकी पर आसीन होकर हाथी पर विदा होती हैं।
महंत ने बताया नवरात्रि साल में चार बार आती है, जो चैत्र, आषाढ़, आश्विन (शारदीय) और माघ महीनों में मनाई जाती है; इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे प्रमुख हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं और विशेष साधना के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च को रामनवमी के साथ समाप्त होगी, जिसमें घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 19 मार्च की सुबह रहेगा, जो 6:52 बजे से शुरू होकर 7:43 बजे तक है। मुख्य तिथियां और मुहूर्त प्रतिपदा तिथि: 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे से शुरू
घटस्थापना मुहूत:र् 19 मार्च, सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक समापन: 27 मार्च (रामनवमी) को होगा।
इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, जिसके कारण माना जा रहा है कि मां दुर्गा पालकी (डोली) पर सवार होकर आएंगी, जो बदलाव का संकेत होता है।
कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 19 मार्च को ही है, और आप अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 12:05 से 12:53) में भी कलश स्थापना कर सकते हैं।
कन्या पूजन का महत्व-अष्टमी का व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा. इस दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. कन्या पूजन कर मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं. नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। माता रानी (माँ दुर्गा) को नींबू, इमली, नाशपाती, अंजीर और सूखे नारियल जैसे फल नहीं चढ़ाने चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है, साथ ही सड़े-गले, जूठे या बासी फल भी अर्पित नहीं करने चाहिए, क्योंकि यह उ…

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