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’156 दिनों में हजारों कलाकारों को मिला मंच, सुर साधना से चमकी यूपी की लोक कला’

गोविन्द प्रजापति
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने बताया कि स्थानीय कलाकारों को आगे बढ़ाने के लिए ’सुर साधना’ जैसी खास पहल के तहत यूपी के 22 जिलों में साप्ताहिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें अलग-अलग जिलों के धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों पर कलाकार अपनी प्रस्तुति दे रहे हैं। खास बात यह है कि 156 दिनों में अब तक 374 सांस्कृतिक दलों के लगभग 2200 से ज्यादा कलाकार इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं, जिससे प्रदेश की लोक संस्कृति को नया मंच मिल रहा है। वहीं दर्शकों को भी प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं को करीब से देखने और समझने का मौका मिल रहा है।
श्री सिंह ने बताया कि इन कार्यक्रमों में कई तरह की सांस्कृतिक विधाओं की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। कलाकार लोकगायन, भजन-कीर्तन, लोकनृत्य, लोकनाट्य, कठपुतली और जादू जैसी विधाओं का प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा शास्त्रीय गायन-वादन, किस्सागोई और काव्य पाठ भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को प्रदेश की विविध लोक परंपराओं से रूबरू होने का मौका मिलता है। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे उस क्षेत्र की पारंपरिक कला को बढ़ावा मिल सके। कलाकारों को उनकी प्रस्तुति के अनुसार मानदेय भी दिया जाता है। लोक नृत्य के लिए 15,000 रुपए, लोक भजन गायन के लिए 10,000 रुपए और अन्य विधाओं जैसे जादू, कठपुतली, किस्सागोई/दास्तानगोई और काव्य पाठ के लिए 5,000 रुपए मानदेय निर्धारित किया गया है। इससे कलाकारों को आर्थिक सहयोग भी मिल रहा है और वे अपनी कला को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर पा रहे हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि सुर साधना कार्यक्रम में कुसुमवन सरोवर (मथुरा), झांसी का किला (झांसी), रामघाट (चित्रकूट), नया अस्सी घाट (वाराणसी), त्रिवेणी घाट (प्रयागराज), कुड़िया घाट और जनेश्वर मिश्र पार्क (लखनऊ), शिल्पग्राम (आगरा), डाइट ऑडिटोरियम विकास भवन (बदायूं), नैमिषारण्य धाम (सीतापुर), राम की पैड़ी (अयोध्या), रामगढ़ताल (गोरखपुर), सामौर बाबा धाम (फिरोजाबाद), सीता समाहित स्थल (भदोही), बटेश्वर धाम (आगरा) और पाल्हमेश्वरी देवी मंदिर (आजमगढ़) जैसे स्थान शामिल हैं। इसके अलावा विंध्यवासिनी देवी मंदिर (विंध्याचल/मिर्जापुर), प्रेम मंदिर (वृंदावन/मथुरा), शुक्र तीर्थ (मुजफ्फरनगर), देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़), मां शाकुंभरी देवी मंदिर (सहारनपुर) और शीतला माता मंदिर (मैनपुरी) जैसे जिलों के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी सुर साधना के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
जयवीर सिंह ने बताया कि, उत्तर प्रदेश की लोक कला और लोक परंपराएं हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत की मजबूत नींव हैं। ‘सुर साधना’ जैसे आयोजन इन परंपराओं को नया जीवन देने का काम कर रहे हैं। इस पहल के माध्यम से प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है और लोगों को भी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का मौका मिल रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के हर क्षेत्र में मौजूद कलाकारों को मंच मिले और प्रदेश की लोक संस्कृति नई पीढ़ी तक पहुंचे, ताकि हमारी परंपराएं लगातार जीवंत और मजबूत बनी रहें।
इच्छुक स्थानीय कलाकार ‘यूपी संस्कृति ऐप’ के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं और अपनी कला को मंच पर प्रस्तुत करने का मौका पा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच देना, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना और पारंपरिक लोक कलाओं को बचाए रखना है। साथ ही इसका उद्देश्य शहर और गांव दोनों जगह के लोगों को लोक संस्कृति से जोड़ना और समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना भी है।

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