• Home
  • State News
  • जर्जर संजय सेतु की मरम्मत: क्या करदाताओं के धन का उपयोग स्थायी और दीर्घकालिक समाधान हेतु नहीं किया जाना चाहिए?
Image

जर्जर संजय सेतु की मरम्मत: क्या करदाताओं के धन का उपयोग स्थायी और दीर्घकालिक समाधान हेतु नहीं किया जाना चाहिए?

बहराइच/देवीपाटन मंडल, घाघरा नदी पर स्थित संजय सेतु की लगातार जर्जर होती स्थिति को लेकर क्षेत्र में गहरी चिंता व्याप्त है। विगत लगभग आठ वर्षों से यह पुल अस्थायी मरम्मत और अंतरिम व्यवस्थाओं के सहारे संचालित हो रहा है। स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, छात्रों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर स्थायी समाधान की मांग उठाई जाती रही है, किंतु नए पुल के निर्माण की दिशा में अब तक ठोस प्रगति परिलक्षित नहीं होती। हर बार पूछे जाने पर यह कहा जाता है कि प्रस्ताव भेजा जा चुका है, डीपीआर तैयार की जा रही है या बजट स्वीकृति की प्रतीक्षा है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और केवल मरम्मत कार्यों का दोहराव होता रहा है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार वर्षों में मरम्मत पर लाखों-करोड़ों रुपये व्यय किए गए, फिर भी पुल की संरचनात्मक मजबूती को लेकर संतोषजनक आश्वासन सामने नहीं आया। विशेषज्ञों का मत है कि यदि किसी संरचना की मूल अवस्था निरंतर कमजोर हो रही हो, तो बार-बार की मरम्मत दीर्घकालिक समाधान सिद्ध नहीं होती। ऐसी स्थिति में पुनर्निर्माण अथवा समानांतर नए पुल के निर्माण पर प्राथमिकता से विचार आवश्यक होता है। संजय सेतु केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं की जीवनरेखा है। किसी संभावित दुर्घटना की आशंका नागरिकों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर रही है। ऐसे में जनता के मन में स्वाभाविक प्रश्न उठ रहे हैं: क्या क्षेत्रवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है? क्या करदाताओं के धन का उपयोग स्थायी और दीर्घकालिक समाधान हेतु नहीं किया जाना चाहिए? क्या आठ वर्षों का इंतजार पर्याप्त नहीं है? उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित विभागों एवं शासन से मांग की जाती है कि: संजय सेतु की वर्तमान संरचनात्मक स्थिति की स्वतंत्र एवं पारदर्शी तकनीकी जांच कराई जाए। नए पुल के निर्माण हेतु स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए। स्वीकृत बजट, प्रगति रिपोर्ट तथा निर्धारित समयसीमा की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की जाए। निर्माण पूर्ण होने तक सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न्यूनतम रहे। यह विषय केवल एक पुल तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता की सुरक्षा, विश्वास और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा है। अब समय आ गया है कि अस्थायी मरम्मत के चक्र से आगे बढ़कर स्थायी समाधान की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जाएँ।

Releated Posts

आजमगढ़ में रेप और मर्डर के आरोपी को उम्रकैद:2020 में की थी वारदात, 12 गवाहों ने दी गवाही

बलराम सिंह/आजमगढ़ कोर्ट ने दुष्कर्म के बाद हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने…

डीएम बोले- सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश ने विकास के आयाम स्थापित किए

अरविन्द कुमार पटेल/जौनपुर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह की नौ…

प्रयागराज-जौनपुर हाइवे पर खड़े ट्रक से टकराई रोडवेज बस: 9 यात्री घायल,

अरविन्द कुमार पटेल/जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र में प्रयागराज-मुंगरा बादशाहपुर हाईवे पर शनिवार सुबह एक रोडवेज बस…

गोंठा दुर्गा मंदिर में भव्य श्रृंगार:नवरात्र में उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़

रामनरेश कुमार /दोहरीघाट क्षेत्र स्थित गोंठा में नव निर्मित दुर्गा मंदिर में नवरात्र के अवसर पर प्रतिदिन मां…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top