
बजट में की गई इस वृद्धि से स्पष्ट है कि सरकार अब केवल बड़े महानगरों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है, बल्कि छोटे शहरों का भी समान रूप से विकास किया जाएगा।
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इस बजट में टियर-2 और टियर-3 श्रेणी के शहरों के लिए 5,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जिसमें उत्तर प्रदेश को लगभग 900 करोड़ रुपये की राशि मिलने की उम्मीद है। यह निधि आने वाले पांच वर्षों के दौरान सड़क, यातायात, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं और रोजगार सृजन पर खर्च की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य महानगरों की ओर पलायन को कम करना और संतुलित शहरीकरण को बढ़ावा देना है, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नगर विकास विभाग के अनुसार, इस धनराशि को चरणबद्ध तरीके से खर्च किया जाएगा, ताकि छोटे शहरों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
बजट में की गई इस वृद्धि से स्पष्ट है कि सरकार अब केवल बड़े महानगरों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है, बल्कि छोटे शहरों का भी समान रूप से विकास किया जाएगा। इन शहरों में सड़क और यातायात सुविधाओं का विस्तार, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का सुधार, और शहरी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में टियर-2 श्रेणी के 15 और टियर-3 श्रेणी के 40 शहर हैं। टियर-2 शहरों की आबादी पांच लाख से अधिक है, जबकि टियर-3 शहरों की आबादी एक से तीन लाख के बीच है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन शहरों के सशक्त होने से न केवल आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी, बल्कि महानगरों की ओर पलायन भी घटेगा, जिससे शहरों का बेहतर संतुलन कायम होगा।
इसके अतिरिक्त, स्मार्ट सिटी योजना के तहत कई शहरों में पहले ही काम शुरू हो चुका है, लेकिन छोटे शहरों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है। यह बजट इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जो प्रदेश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
प्रमुख टियर-2 शहरों में लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, गोरखपुर, बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, झांसी और मथुरा शामिल हैं।



















