
बाराबंकी। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में सवर्ण समाज के सदस्यों ने केंद्र सरकार के यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (न्ळब्) के नए कानून के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की और राष्ट्रपति को एक रजिस्ट्री भेजी। यह विरोध प्रदर्शन सिरौली गौसपुर तहसील के मुख्य द्वार पर आयोजित किया गया था। इसमें बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के अधिवक्ता, ग्राम प्रधान और स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यूजीसी का नया कानून उनकी बात सुने बिना लागू किया गया है, जिससे समाज के एक विशेष वर्ग को नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून जातीय भेदभाव को बढ़ावा देता है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा, “हमारी बातों को अनसुना किया जा रहा है। यदि यह कानून लागू रहा तो हमारे समाज को नुकसान उठाना पड़ेगा, इसलिए इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने इस कानून को “काला कानून” बताते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि शिक्षा से जुड़े ऐसे कानून को सभी वर्गों की सहमति से लागू किया जाना चाहिए, न कि एकतरफा निर्णय के माध्यम से। इस प्रदर्शन में ग्राम प्रधान शिवा मिश्रा, संजय सिंह एडवोकेट और अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने मुख्य रूप से सहयोग किया। दीपक मिश्रा, दीपू तिवारी एडवोकेट और वीरेन्द्र सिंह एडवोकेट सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित थे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।















